उज्जैन रिपोर्ट प्रयागराज महाकुंभ 2025 में हुई अव्यवस्थाओं और भगदड़ की वजह से साधु-संतों ने अमृत स्नान का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। इस घटना ने महाकुंभ के आध्यात्मिक महत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या हुआ प्रयागराज में?
महाकुंभ में स्नान के लिए उमड़ी भारी भीड़ के चलते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इसके कारण प्रशासन को सेना की मदद लेनी पड़ी। हालात बिगड़ते देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार बार फोन पर बातचीत की और दुख जताया। रेलवे ने 20-25 अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था की ताकि लोगों को जल्दी से जल्दी प्रयागराज से निकाला जा सके।
अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस कुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना पहले से ही थी, फिर भी भीड़ प्रबंधन को लेकर पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। जब भीड़ को रोका गया, तो पिछले हिस्से से धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे भगदड़ मच गई। उज्जैन महाकाल मंदिर में 35 लोगों की मौत वाली घटना की तरह, यहां भी भारी नुकसान हुआ।
साधु-संतों का आक्रोश और बहिष्कार
इस हादसे से नाराज साधु-संतों ने अमृत स्नान का बहिष्कार कर दिया। उनका कहना है कि इस महाकुंभ में आध्यात्मिकता की जगह दिखावा और राजनीतिक ड्रामा ज्यादा हावी रहा।
सोशल मीडिया और मीडिया का झूठा दिखावा
महाकुंभ की असली तस्वीर को मीडिया और सोशल मीडिया में तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। धार्मिक आयोजनों की जगह केवल सनसनीखेज और ग्लैमरस खबरों को तरजीह दी गई। असली संतों और धार्मिक क्रियाकलापों को मीडिया में जगह नहीं मिली।
क्या हमें अंधविश्वास छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए?
भगदड़ और मौतों के बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि क्या हमें धर्म और श्रद्धा के नाम पर अंधविश्वास से बाहर आना चाहिए? अगर गंगा में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं, तो क्या वे पाप जलचक्र के जरिए दोबारा हमारे ऊपर ही नहीं लौटेंगे?
निष्कर्ष
प्रयागराज महाकुंभ 2025 न केवल भगदड़ और अव्यवस्थाओं की वजह से याद किया जाएगा, बल्कि इसने यह भी दिखा दिया कि धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन कितना लचर हो सकता है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से सीख लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करे।