धर्म नगरी वाराणसी में 3 से 5 अप्रैल तक होगा महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का ऐतिहासिक मंचन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित
सम्राट विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय के शाश्वत प्रतीक
अवंतिका की पावन धरा पर 2028 में होगा, भव्य, दिव्य और अलौकिक सिंहस्थ
वाराणसी में ऐतिहासिक मंचन से सांस्कृतिक नवजागरण का होगा उदय

भोपाल : बुधवार, अप्रैल 1, 2026,

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय काल-गणना के प्रणेता और न्यायप्रियता के प्रतीक चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य की गाथा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी की गलियों में प्रतिध्वनित होगी। धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आगामी 3 से 5 अप्रैल, 2026 (विक्रम संवत् 2083, वैशाख कृष्ण पक्ष) तक भारत के स्वाभिमान और विकास की गाथा का भव्य उत्सव मनाया जाएगा। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का ऐतिहासिक मंचन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में यह आयोजन भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों को जीवंत करेगा। इस गरिमामय समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में होगा। इस वृहद आयोजन का उद्देश्य देश के गौरवशाली इतिहास, विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता और उस युग के अनुपम योगदान से जन-मानस को परिचित कराना है।

बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित

प्राचीन भारतीय कालगणना के ऐतिहासिक केंद्र उज्जैन में पिछले वर्ष विश्व की पहली ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ की सफल स्थापना के बाद, अब इसे देश के अन्य ज्योतिर्लिंगों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय काल गणना की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने के इस प्रयास अन्तर्गत वाराणसी में सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को यह वैदिक घड़ी समर्पित की जा रही है। इस घड़ी की विशेषता न केवल इसकी पारंपरिक गणना पद्धति है, बल्कि इसका डिजिटल विस्तार भी है। इसके लिए एक विशेष ऐप भी लॉन्च किया गया है जो विश्व की 180 से अधिक भाषाओं में समय और पंचांग की जानकारी उपलब्ध करा रहा है। उज्जैन से शुरू होकर काशी के गलियारों तक पहुँचने वाली यह पहल न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध कर रही है, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करने का कार्य भी कर रही है।

महानाट्य के सांस्कृतिक गौरव की निरंतर यात्रा

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की यात्रा वर्ष 2007 में प्रारंभ हुई थी। सफलता के सोपान चढ़ते हुए इस नाटक का मंचन अब तक उज्जैन, भोपाल, आगरा और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में किया जा चुका है, जहाँ हज़ारों दर्शकों ने इसे सराहा है। अप्रैल 2025 में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित इसके मंचन को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी विशेष रूप से सराहा था। उन्होंने इस प्रस्तुति को सम्राट विक्रमादित्य के वैभव और भारतीय गौरव को जन-जन तक पहुँचाने का एक अनुकरणीय प्रयास बताया।

महानाट्य विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय का संगम

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य उज्जैनी के महान सम्राट के जीवन, उनके अदम्य साहस और न्यायप्रियता को जीवंत करता है। नाटक के माध्यम से 57 ईसा पूर्व प्रारंभ हुए ‘विक्रम संवत्’ के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्त्व को सशक्त संवादों द्वारा प्रस्तुत किया गया है। दर्शकों को इसमें जहाँ ‘सिंहासन बत्तीसी’ और ‘बेताल पच्चीसी’ के रोचक प्रसंग देखने को मिलेंगे, वहीं भविष्य पुराण के गंभीर संदर्भों से भी परिचय होगा।

महानाट्य प्रस्तुति का एक मार्मिक पक्ष विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारतीय ज्ञान, विज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर को पहुँचाई गई क्षति को भी दर्शाना है। इसके साथ ही सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के ‘नवरत्नों’—महाकवि कालिदास और महान खगोलशास्त्री वराहमिहिर—की विद्वता को भी बड़े प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा गया है।

अत्याधुनिक तकनीक और भव्यता का मेल

सम्राट विक्रमादित्य आधारित महानाट्य की लगभग 1 घंटे 45 मिनट की इस भव्य प्रस्तुति में कला और तकनीक का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा। मंच पर 175 से अधिक कलाकार और सहयोगी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। नाटक को सजीव बनाने के लिए मंच पर रथ, अश्व (घोड़े), पालकी और ऊँटों का प्रयोग किया जाएगा। तीन अलग-अलग मंचों और अत्याधुनिक ग्राफिक्स व स्पेशल इफेक्ट्स से अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किये जाएंगे।

विविध प्रदर्शनियाँ और सामाजिक संकल्प

महानाट्य के साथ-साथ आयोजन स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियाँ भी लगाई जा रही हैं। इनमें सम्राट विक्रमादित्य व अयोध्या, भारतीय ऋषि-वैज्ञानिक परंपरा पर केंद्रित ‘आर्ष भारत’, शिव पुराण, चौरासी महादेव, श्री हनुमान और मध्यप्रदेश के पवित्र स्थानों की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की जाएगी।

यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि ‘स्वच्छ और समृद्ध मध्यप्रदेश’ के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान करता है, ताकि हम अपनी जड़ों से जुड़कर एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकें।

महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य: एक गौरवशाली प्रस्तुति

उज्जैन की पावन धरा और न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य के स्वर्णिम इतिहास को जीवंत करने के लिए ‘महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य’ का मंचन एक ऐतिहासिक पहल है। इस भव्य नाटक की परिकल्पना मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गई है, जो भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता को दर्शाती है। इस कालजयी कृति का लेखन पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने किया है, जिनकी लेखनी ने इतिहास के पन्नों को सजीव कर दिया है। नाटक का कुशल निर्देशन संजीव मालवीय द्वारा किया गया है, जबकि प्रस्तुति संयोजक के रूप में राजेश सिंह कुशवाहा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस गौरवशाली कलाकृति की प्रस्तुति ‘श्री विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन’ द्वारा की जा रही है। यह महानाट्य मनोरंजन के साथ नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के साहस, न्याय और सुशासन के आदर्शों से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम भी है। ऐसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हमारी गौरवशाली विरासत को अक्षुण्ण रखने में सहायक सिद्ध होती हैं।

ऐतिहासिक नाटक ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का मुख्य आकर्षण: दिग्गज कलाकारों का सशक्त अभिनय

सम्राट विक्रमादित्य के अदम्य साहस, त्याग और उनके नवरत्नों की विद्वता अब रंगमंच पर अपने अभिनव से रंग बिखेरने को तैयार है। ऐतिहासिक नाटक ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का मुख्य आकर्षण दिग्गज कलाकारों का अभिनय है।नाटक के केंद्रीय पात्र सम्राट विक्रमादित्य की गरिमामयी भूमिका में विक्रम सिंह चौहान और डॉ. राहत पटेल नज़र आएंगे। वहीं, उनके बचपन के संघर्षों को कृष्णा राठौर (बाल विक्रमादित्य) जीवंत करेंगे। कथा को सूत्र में पिरोने का कार्य प्रख्यात सूत्रधार दुर्गेश बाली करेंगे।

राजा गर्दभिल्ल की चुनौतीपूर्ण भूमिका में चेतन शाह और शंकर राव साठे अपने अभियान का प्रदर्शन करेंगे। महारानी वीरमति के रूप में रेणुका देशपांडे और भर्तृहरि के किरदार में सूरज चौधरी दर्शकों को उस कालखंड की याद दिलाएंगे। दर्शकों के लिए विशेष रोमांच का केंद्र बेताल का पात्र होगा, जिसे ऋषि योगी और बंटी सोलंकी निभा रहे हैं।

नवरत्नों और भव्य सैन्य दल का संगम

सम्राट के दरबार की शोभा बढ़ाने वाले प्रसिद्ध नवरत्नों में महाकवि कालिदास (रवि परमार), वराहमिहिर (विकास परिहार) और अमर सिंह (प्रित मीणा) जैसे विद्वान पात्र आकर्षण का केंद्र होंगे। महानाट्य को भव्यता प्रदान करने के लिए सुश्री आरोही आठवले के नेतृत्व में एक विशाल नृत्य दल और विक्रम सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी मंच पर युद्ध और विजय के दृश्यों को सजीव करेगी।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण के महाकुंभ, ‘विक्रमोत्सव’ ने स्थापित किए सफलता के नए सोपान

‘विक्रमोत्सव’ आज केवल एक आयोजन मात्र नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा और सांस्कृतिक स्वाभिमान के पुनर्जागरण का एक वैश्विक महाअभियान बन चुका है। विरासत से विकास की ओर अग्रसर यह उत्सव आस्था और आधुनिकता का वह अनूठा संगम है, जिसने अपनी भव्यता से संपूर्ण विश्व को चमत्कृत किया है। वर्ष 2026 के इस आयोजन में 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियों—जैसे महाकाल वन मेला, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, और वेद अंताक्षरी—ने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। 4 हजार से अधिक कलाकारों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियों और ‘ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड्स 2025’ (Longstanding IP of the year) जैसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों ने यह सिद्ध कर दिया है कि विक्रमोत्सव अब एशिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मंच के रूप में अपनी अमिट पहचान बना चुका है।

सम्राट विक्रमादित्य सम्मान: न्याय और शौर्य की विरासत को मिला वैश्विक विस्तार

लोक-कल्याण और गौरवशाली परंपराओं को संजोने के इस सफर ने अब तक 17.72 करोड़ से अधिक लोगों के हृदय को छुआ है, जो सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान है। मध्यप्रदेश सरकार ने युग-निर्माता सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति को अक्षुण्ण रखने और उनके न्याय, धर्म व प्रजावत्सल गुणों को समाज में पुनः स्थापित करने के लिए ‘सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान’ की स्थापना की है। एक करोड़ 1 लाख रुपये की सम्मान राशि के साथ यह देश का सबसे बड़ा पुरस्कार होने जा रहा है। इसके साथ ही, 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और 5-5 लाख रुपये के तीन राज्य स्तरीय सम्मानों की घोषणा कर सरकार ने न केवल अपने महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके शौर्य और उदारता की विरासत को भी सुरक्षित कर दिया है।

सम्राट विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय के शाश्वत प्रतीक

सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के वो दैदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिन्होंने न केवल विदेशी आक्रांताओं (शकों) को पराजित कर राष्ट्र की सीमाओं को सुरक्षित किया, बल्कि न्याय, शौर्य और कला के एक स्वर्णिम युग का सूत्रपात भी किया। उज्जैन के इस सार्वभौम सम्राट का शासनकाल भारत के सर्वांगीण विकास का साक्षी रहा है। उनके दरबार के ‘नवरत्न’, जिनमें महाकवि कालिदास और महान खगोलविद वराहमिहिर जैसे विद्वान शामिल थे, भारत की अद्वितीय बौद्धिक संपदा के प्रतीक रहे हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों, मुद्राओं और चीनी यात्री ह्वेनसांग जैसे विदेशी इतिहासकारों के वृत्तांतों में विक्रमादित्य के वैभवशाली शासन की पुष्टि होती है, जो आज भी हमारी सांस्कृतिक चेतना का गौरवशाली आधार है।

विक्रम संवत: वैज्ञानिक काल-गणना और सांस्कृतिक धरोहर

विक्रम संवत् केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि भारतीय ऋषियों द्वारा विकसित एक सूक्ष्म और वैज्ञानिक काल-गणना पद्धति है। 57 ईसा पूर्व में प्रारंभ हुआ यह संवत भारतीय नववर्ष ‘चैत्र शुक्ल प्रतिपदा’ से जुड़ा है, जिसे पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के आरंभ का दिन माना जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे गुड़ी पड़वा, उगादी और पोइला बैशाख जैसे विविध नामों से मनाया जाता है, जो प्रकृति और संस्कृति के अटूट जुड़ाव को दर्शाता है। वराहमिहिर और ब्रह्मगुप्त जैसे महान गणितज्ञों द्वारा प्रतिपादित यह पंचांग आज भी काल के सटीक निर्धारण के लिए विश्व में अद्वितीय माना जाता है।

विरासत का पुनर्जागरण और विश्वगुरु का संकल्प

इतिहास के पन्नों में विदेशी आक्रांताओं द्वारा हमारी ज्ञान-परंपरा और स्थापत्य को नष्ट करने के जो प्रयास किए गए, वर्तमान समय उन स्मृतियों को पुनः जीवंत करने का अवसर है। सम्राट विक्रमादित्य को अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर सहित 300 से अधिक मंदिरों के पुनर्निर्माण का श्रेय दिया जाता है। आज का भारत अपनी इस पुरातन शक्ति को पहचानकर ‘विश्वगुरु’ के रूप में प्रतिष्ठित होने के पथ पर अग्रसर है। विक्रम संवत और सम्राट विक्रमादित्य का गौरव न केवल हमारे मनोबल को बढ़ाता है, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत कर एक नए युग के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है।

भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण जैसे अवतारों के बाद भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय नायक सम्राट विक्रमादित्य ही है। भारत वर्ष के सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रसिद्ध पुरातन पुरुषों में विक्रमादित्य अग्रणी है। उनकी वीरता, देश को पराधीनता से मुक्त करने की उत्कृष्ट अभिलाषा राजनीतिक उपलब्धियों सैनिक अभियान और विजय यात्राएँ शासन की आदर्श अनोखी विवेकपूर्ण न्यायपद्धति, कला एवं साहित्य की उन्नति में उदार सहयोग तथा सहभागिता जैसे उदात्त गुणों ने भारत ही नहीं आस-पास और सुदूर देशों में भी उन्हें सदा के लिये प्रतिष्ठित कर दिया। शकों ने भारत पर आक्रमण कर आंतक मचाया था। शक राजा महाबली, अर्थलोभी, पापी और दुष्ट थे, क्रूर हिंसक देश विरोधी शकों की उस दुर्दान्त, प्रलयंकारी काली छाया से विक्रमादित्य ने भारत को मुक्त कराया और 18 शक सामन्तों को पराजित कर उन्हें भारत से भागने पर विवश कर दिया था। शकों को खदेड़ कर ही शकारि और साहसांक की उपाधियाँ धारण की। आज भी विकमादित्य द्वारा 2083 वर्ष पूर्व प्रारम्भ विक्रम सम्वत् भारत वर्ष ही नहीं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ कालगणना का आधार है।

बेताल पच्चीसी और सिहांसन बत्तीसी में विक्रमादित्य के अद्भुत, विवेकपूर्ण न्याय, वीरता, शौर्य एवं महानता की कथाएँ सर्वविदित है, जिनके दरबार में नवरत्न कालिदास, वररूचि, वराहमिहिर, क्षपणक, घटकर्पर, अमर सिंह, बेताल भट्ट, शंकु, धन्वन्तरि जैसे प्रसिद्ध नवरत्न सदा जनकल्याणकारी कार्यों में ही लगे रहते थे।

वर्तमान समय जनजातीय समाज के विकास का अभूतपूर्व काल- राज्यपाल श्री पटेल

योजनाएं जनजातीय समाज के समग्र विकास और सशक्तिकरण की पहल- राज्यपाल श्री पटेल
राज्यपाल श्री पटेल कन्हारीकला में दुधारू पशु वितरण एवं स्वास्थ्य शिविर में हुए शामिल

भोपाल : बुधवार, अप्रैल 1, 2026, राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्तमान समय जनजातीय समाज के विकास का अभूतपूर्व काल है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनजातीय वर्ग का समग्र विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन), धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय समाज के समग्र विकास और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह बात राज्यपाल श्री पटेल ने बुधवार को मंडला जिले के बिछिया विकासखंड के कन्हारीकला में दुधारू पशु वितरण एवं स्वास्थ्य शिविर के आयोजन में जनसमूह को संबोधित करते हुए कही।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि दूध का पहले बच्चों के पोषण में उसके बाद अतिरिक्त दूध को बेचकर आय बढ़ाने में उपयोग करें। पशुओं की देखभाल बच्चों की तरह ही करनी चाहिए। समय पर चारा, पानी और बीमारी होने पर दवाइयों का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़े स्तर पर सिकलसेल जांच अभियान चलाया जा रहा है। अब तक एक करोड़ 28 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है।  उन्होंने जेनेटिक कार्ड को बीमारी की रोकथाम का तरीका बताया। कार्ड का मिलान कर विवाह करने का परामर्श दिया। उन्होंने बताया कि गर्भस्थ और प्रसूति के 72 घंटे के भीतर नवजात शिशुओं की भी जांच संभव है। जांच के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इन प्रयासों से बच्चों का वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य और भविष्य सुरक्षित होगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं से जनजातीय क्षेत्रों में जाकर लोगों को बीमारी के लक्षण और जांच के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए कहा।

राज्यपाल श्री पटेल ने कार्यक्रम के दौरान बैगा जनजातीय नृत्य प्रस्तुति की सराहना की। जनजातीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर को संरक्षित और प्रोत्साहित करना सभी की जिम्मेदारी बताई। प्रवास के दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य शिविर, पशु मेले एवं प्रदर्शनी का अवलोकन किया और गो-पूजन किया। गो-माता को फूल माला पहनाई और गुड़-केला खिलाया। संबंधितों के साथ चर्चा में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और पर्यावरण के समन्वित विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला आंगनवाडी हैं, जहां उनके समग्र विकास की मजबूत नींव रखी जाती है। उन्होंने कहा कि हरित भविष्य के लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण के साथ बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए घर में उपयोग किए गए पानी से आंगनवाड़ी की पोषण वाटिका की सिंचाई करने के लिए कहा है।

राज्यपाल के आंगनवाड़ी आगमन पर आत्मीयता, संस्कार और उत्सव का समन्वय देखने को मिला। राज्यपाल की आंगनवाड़ी में उपस्थिति पर नन्ही बच्ची प्रिया भारतीय और राज्यमंत्री श्री लखन पटेल ने जन्मदिवस की खुशियों को केक काटकर साझा किया। राज्यपाल ने परिसर में अशोक का पौधा रोपित किया।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनजातीय समाज तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी की पहल से महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है। उन्होंने  किसानों को पशुपालन अपनाकर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल श्री पटेल का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्यपाल सुनिश्चित कर रहे हैं कि शासन की योजनाएं धरातल पर सही तरीके से लागू हो। उन्होंने कहा कि पहले जनजातीय क्षेत्रों में सिकलसेल की जानकारी नहीं हो पाती थी, लेकिन अब लगातार जांच शिविर आयोजित होने से लोग जागरूक हुए है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य शिविरों में जाकर जांच कराने की अपील की है।

पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम जनजातीय समाज के विकास का मील का पत्थर और एक नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने राज्यपाल श्री पटेल द्वारा जनजातीय कल्याण के लिये किए जा रहे कार्यों की सराहना की। सरकार द्वारा पशुपालन से बैगा परिवारों को रोजगार द्वारा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का प्रयास बताते हुए दुग्ध उत्पादन को आय और स्वास्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण बताया। पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और बीमा पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

राज्यपाल श्री पटेल ने किया हितलाभ वितरण

कार्यक्रम में बैगा समाज के प्रतिनिधि द्वारा राज्यपाल श्री पटेल का पारंपरिक तरीके से सम्मान भी किया गया। राज्यपाल श्री पटेल ने मंडला जिले के 50, डिंडौरी जिले के 24 एवं बालाघाट जिले के 20 बैगा जनजाति के कुल 94 हितग्राहियों को मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत पशु प्रदाय किए। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, टीबी फूड बास्केट,  एचवीपी प्रमाण पत्र, वन काष्ठ लाभांश भी प्रदान किए।

उज्जैन में मौसम का अनोखा मिज़ाज, धार्मिक उल्लास और शहर की चुनौतियों पर उठे सवाल

उज्जैन, 31 मार्च। धार्मिक नगरी Ujjain में मंगलवार की शाम एक ओर जहां मौसम ने हैरान कर दिया, वहीं दूसरी ओर धार्मिक आयोजन और शहर की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चाएं भी तेज रहीं।

शाम को आसमान में दिखा अनोखा नजारा
शहर में शाम करीब 7 बजे से 8:15 बजे के बीच अचानक काले बादल छा गए। इस दौरान लगातार और कई दिशाओं में बिजली की तेज चमक देखी गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, इतनी व्यापक और लगातार बिजली चमकने का दृश्य कम ही देखने को मिलता है। मौसम के इस अप्रत्याशित बदलाव ने लोगों को चौंका दिया।

भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर निकला भव्य बरगोड़ा
इसी दिन Mahavira जन्म कल्याणक महोत्सव पर जैन समाज द्वारा भव्य बरगोड़ा निकाला गया। हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। बैंड, भक्ति संगीत और महिलाओं के भजन मंडलों ने आयोजन को भक्ति से भर दिया। पूरे शहर में जयकारों के साथ उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
शहर में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी लोगों में असंतोष देखा जा रहा है। कई नागरिकों का कहना है कि निजी चिकित्सकों द्वारा जांच (टेस्ट) पर अधिक निर्भरता बढ़ गई है, जिससे इलाज महंगा हो रहा है। मरीजों ने शुल्क और दवाइयों की कीमतों को लेकर भी चिंता जताई है।

विकास और व्यवस्थाओं पर जनता की नाराजगी
शहर में यातायात, सफाई, पेयजल और अव्यवस्थित शहरीकरण जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। नागरिकों का मानना है कि विकास योजनाएं जमीन पर कम और घोषणाओं में ज्यादा नजर आती हैं।

  • मुख्य सड़कों के चौड़ीकरण की मांग
  • चौराहों पर यातायात सुधार
  • उपमार्गों का व्यवस्थित विकास
    जैसे सुझाव सामने आ रहे हैं।

गंभीर डैम परियोजना पर सवाल
पेयजल संकट के समाधान के लिए गंभीर डैम के दूसरे चरण को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस परियोजना की प्रगति स्पष्ट नहीं है, जिससे भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।

महाकाल मंदिर में व्यवस्थाओं की जरूरत
Mahakaleshwar Jyotirlinga में दर्शन व्यवस्था को लेकर भी बहस जारी है। श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि केवल सुगम “चलित दर्शन” व्यवस्था लागू की जाए, जिससे भीड़ और असुविधा कम हो सके।

अन्य समस्याएं भी बनी चुनौती
शहर में आवारा पशु, मच्छरों का बढ़ता प्रकोप, सफाई व्यवस्था की कमी और नशे के कारोबार जैसी समस्याएं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।

महंगाई, आर्थिक दबाव और राजनीतिक तनाव—देश में बढ़ती चुनौतियों पर बहस तेज

देश इस समय कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहा है। बढ़ती महंगाई, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर और राज्यों में जारी राजनीतिक घटनाक्रम ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पर संतुलित और तथ्यात्मक दृष्टिकोण से चर्चा जरूरी है।

महंगाई के मोर्चे पर आम जनता की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें कई शहरों में 1100 रुपये के आसपास पहुंच गई हैं, जिससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों का बजट प्रभावित हुआ है। पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों ने परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम पर भी असर डाला है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्षों, विशेषकर खाड़ी क्षेत्र में तनाव, का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। आयात लागत बढ़ने और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के कारण आर्थिक दबाव महसूस किया जा रहा है।

राजनीतिक मोर्चे पर भी स्थिति कम जटिल नहीं है। Eknath Shinde के नेतृत्व में Shiv Sena के भीतर चल रही खींचतान और गठबंधन राजनीति ने National Democratic Alliance (NDA) की आंतरिक स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। महाराष्ट्र में हाल के घटनाक्रमों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।

केंद्र सरकार की नीतियों पर भी विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि देश में आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं है और आर्थिक सुधारों के प्रयास जारी हैं। Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार ने कई योजनाओं और विकास कार्यों का हवाला दिया है।

कॉरपोरेट क्षेत्र को लेकर भी बहस जारी है। Mukesh Ambani और Gautam Adani जैसे बड़े उद्योगपतियों की भूमिका को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। जहां एक पक्ष इसे आर्थिक विकास का संकेत मानता है, वहीं दूसरा पक्ष संतुलन की आवश्यकता पर जोर देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में सरकार, विपक्ष और सभी संबंधित पक्षों को मिलकर ठोस समाधान की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और देश की आर्थिक व सामाजिक स्थिरता बनी रहे।

MSME इकाइयां लाखों परिवारों का सहारा: मुख्यमंत्री

169 करोड़ से अधिक की राशि सीधे खातों में भेजी, स्टार्टअप को भी मिला अनुदान

भोपाल। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) न सिर्फ उद्योग का केंद्र हैं, बल्कि लाखों परिवारों के रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार भी हैं।

मुख्यमंत्री ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में 257 से अधिक MSME इकाइयों को 169.57 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि एक क्लिक से उनके खातों में ट्रांसफर की।


उद्यमियों को हर संभव मदद दे रही सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए हर तरह की मदद और मार्गदर्शन दे रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में निवेश करने के लिए देश और विदेश के सभी निवेशकों का स्वागत है और सरकार उद्योग के लिए बेहतर माहौल बना रही है।


स्टार्टअप को भी मिला बढ़ावा

कार्यक्रम में स्टार्टअप को करीब 28 लाख रुपए की पहली किस्त के रूप में अनुदान दिया गया।
साथ ही कुछ उद्यमियों को औद्योगिक भूमि के आवंटन पत्र भी दिए गए, जिससे वे अपने उद्योग शुरू कर सकें।


8 करोड़ का चेक भी सौंपा गया

इस मौके पर उद्योग मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने लघु उद्योग निगम की ओर से 8 करोड़ रुपए का अंतरिम लाभांश चेक मुख्यमंत्री को सौंपा।


मध्यप्रदेश बन रहा स्टार्टअप हब

सरकार के अनुसार, प्रदेश में अभी 7100 से ज्यादा स्टार्टअप पंजीकृत हैं।
नई नीतियों और डिजिटल सिस्टम के कारण उद्योग शुरू करना आसान हुआ है और नए औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किए जा रहे हैं।


पारदर्शिता और तेजी पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उद्योग से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बना रही है, ताकि उद्यमियों को किसी तरह की परेशानी न हो।
सीधे खाते में राशि ट्रांसफर करना इसी पारदर्शिता का उदाहरण है।

उज्जैन में MBBS सीट दिलाने के नाम पर 4.25 लाख की ठगी, फर्जी प्रिंसिपल बनकर जालसाजों ने किया शिकार

उज्जैन। उज्जैन के नीलगंगा थाना क्षेत्र में MBBS एडमिशन दिलाने के नाम पर 4.25 लाख रुपए की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालसाजों ने खुद को कटिहार मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बताकर पीड़ित को झांसे में लिया और फर्जी दस्तावेज भेजकर रकम ऐंठ ली। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


फर्जी कॉल से शुरू हुआ ठगी का खेल

मंछामन गणेश नगर निवासी सतीश चंद्र पटेल (47) के अनुसार, 15 फरवरी को उन्हें उनके रिश्तेदार के माध्यम से जानकारी मिली कि बिहार के कटिहार मेडिकल कॉलेज में MBBS की एक सीट खाली है।

इसके बाद उन्होंने एक कथित प्रोफेसर के जरिए दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को कॉलेज का प्रिंसिपल “आर.बी. गुप्ता” बताया और कहा कि एक छात्र की मृत्यु के कारण सीट खाली हुई है।


फीस जमा करने का दबाव, निजी खाते में मांगे रुपए

आरोपी ने एडमिशन के नाम पर तुरंत फीस जमा करने का दबाव बनाया और कॉलेज व निजी बैंक खातों की जानकारी भेजी। जालसाज ने यह भी दावा किया कि जिस छात्र की मृत्यु हुई है, उसी के खाते में राशि जमा करने से सीट ट्रांसफर हो जाएगी।

पीड़ित ने भरोसा कर 15 से 17 फरवरी के बीच अपने और परिजनों के खातों से कुल 4.25 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।


फर्जी दस्तावेजों से जीता भरोसा

ठगों ने पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए—

  • नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) का फर्जी लेटर
  • कथित प्रिंसिपल का नकली आईडी कार्ड
  • छात्र का फर्जी अलॉटमेंट लेटर
  • कॉलेज आईडी कार्ड

व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेजे। इन दस्तावेजों को असली मानकर पीड़ित ठगी का शिकार हो गया।


कॉलेज पहुंचने पर खुला राज

19 फरवरी को जब पीड़ित स्वयं कटिहार स्थित मेडिकल कॉलेज पहुंचा, तो असली प्रिंसिपल ने साफ कर दिया कि—

  • उनके नाम से किया गया संपर्क फर्जी है
  • कॉलेज में कोई सीट खाली नहीं है
  • इस तरह की धोखाधड़ी पहले भी सामने आ चुकी है

यहीं से पूरे मामले का खुलासा हुआ।


पश्चिम बंगाल और बिहार से जुड़े तार

पुलिस जांच में सामने आया है कि जिन खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए, उनमें से एक खाता पश्चिम बंगाल के व्यक्ति के नाम पर है।

नीलगंगा थाना पुलिस मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है। मामले में पश्चिम बंगाल और बिहार से जुड़े नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है।


पुलिस जांच जारी

थाना प्रभारी तरुण कुरील के अनुसार, FIR दर्ज कर साइबर ठगी के इस मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।


सावधान रहें: ऐसे बचें एडमिशन ठगी से

  • किसी भी एडमिशन के लिए सीधे कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय से पुष्टि करें
  • निजी खातों में फीस ट्रांसफर करने से बचें
  • फर्जी कॉल और ईमेल से सावधान रहें
  • संदिग्ध मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें

ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव: बढ़ती बयानबाजी के बीच वैश्विक हालात पर नजर

हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ वीडियो माध्यमों पर ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बड़े युद्ध और हमलों को लेकर कई दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन दावों में बड़े पैमाने पर हमले, सैनिक तैनाती और वैश्विक युद्ध जैसी बातें कही जा रही हैं।

हालांकि, आधिकारिक और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के अनुसार, इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है और कई बातें अतिरंजित या भ्रामक प्रतीत हो रही हैं।


क्या है मौजूदा स्थिति?

मध्य-पूर्व क्षेत्र में लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी रहती है, खासकर ईरान और इजराइल के बीच। अमेरिका भी इस क्षेत्र में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।

लेकिन वर्तमान समय में:

  • किसी बड़े वैश्विक युद्ध की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है
  • बड़े पैमाने पर कई देशों पर हमले की पुष्टि नहीं है
  • “लाखों सैनिकों की तैनाती” और “तुरंत विश्व युद्ध” जैसे दावे प्रमाणित नहीं हैं

वायरल दावों में क्या कहा जा रहा है?

वायरल वीडियो और ऑडियो में यह कहा जा रहा है कि—

  • ईरान ने कई देशों पर बड़े हमले किए
  • अमेरिका और इजराइल पर बड़े हमलों की तैयारी है
  • विश्व युद्ध जैसी स्थिति बन रही है
  • कई देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह होने वाली है

लेकिन ये सभी दावे आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं।


विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि:

  • मध्य-पूर्व में तनाव जरूर है, लेकिन “विश्व युद्ध” जैसी स्थिति अभी नहीं है
  • सोशल मीडिया पर भ्रामक और सनसनीखेज खबरें तेजी से फैलती हैं
  • किसी भी बड़ी खबर की पुष्टि विश्वसनीय स्रोतों से करना जरूरी है

भारत पर असर को लेकर क्या सच?

कुछ दावों में भारत की विदेश नीति और संभावित संकट की भी बात कही जा रही है।

हालांकि:

  • भारत सरकार ने किसी भी तरह के युद्ध में शामिल होने की घोषणा नहीं की है
  • भारत की विदेश नीति संतुलन और कूटनीति पर आधारित रहती है
  • वर्तमान में भारत स्थिति पर नजर बनाए हुए है

वाराणसी में 31 मार्च को मध्यप्रदेश का ओडीओपी मॉडल पेश करेंगे

मुख्यमंत्री स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में साझा होंगे नवाचार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 मार्च को वाराणसी में आयोजित सहयोग सम्मेलन में मध्यप्रदेश के ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) मॉडल को प्रस्तुत करेंगे। यह सम्मेलन स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने और राज्यों के बीच नवाचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।


ओडीओपी बना आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में ODOP योजना को एक सशक्त आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्पादन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन की पूरी वैल्यू चेन को जोड़ते हुए कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी रोजगार उपलब्ध करा रही है।

सम्मेलन में इस मॉडल को साझा करते हुए बताया जाएगा कि किस प्रकार ODOP ने स्थानीय उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा दी है।


हर जिले की पहचान को मिला आर्थिक विस्तार

मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों को ODOP के तहत संगठित कर बाजार से जोड़ा गया है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • श्योपुर का अमरूद
  • मुरैना-भिंड की सरसों
  • ग्वालियर का सैंडस्टोन
  • अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम
  • उज्जैन का बाटिक प्रिंट
  • धार का बाघ प्रिंट
  • रतलाम का नमकीन
  • झाबुआ का कड़कनाथ
  • बुरहानपुर की जरी-जरदोजी

जैसे उत्पाद शामिल हैं। यह विविधता दर्शाती है कि प्रदेश के हर क्षेत्र की आर्थिक क्षमता को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है।


राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

मध्यप्रदेश के ODOP मॉडल को वर्ष 2024 में सिल्वर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि प्रदेश के कारीगरों, किसानों और उद्यमियों की दक्षता तथा सरकार द्वारा विकसित मजबूत इकोसिस्टम का परिणाम मानी जा रही है।


निर्यात, कौशल और बाजार का एकीकृत नेटवर्क

राज्य में ODOP को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ते हुए कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
ब्रांडिंग, पैकेजिंग, GI टैगिंग और ई-कॉमर्स के जरिए उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा रही है, जिससे स्थानीय उत्पाद वैश्विक पहचान बना रहे हैं।


एमपी-यूपी सम्मेलन से खुलेंगे नए अवसर

वाराणसी में आयोजित यह सम्मेलन मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच सहयोग को नई दिशा देगा। इसमें दोनों राज्यों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और नीति-निर्माता भाग लेंगे।
इस मंच के जरिए ODOP के प्रभावी क्रियान्वयन, नवाचारों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा होगी।


‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन को मिलेगा विस्तार

इस सम्मेलन के माध्यम से ODOP उत्पादों को नए बाजार मिलेंगे, निर्यात को गति मिलेगी और कारीगरों व उद्यमियों को व्यापक मंच प्राप्त होगा।
मध्यप्रदेश अपने अनुभवों को साझा करते हुए यह प्रदर्शित करेगा कि किस प्रकार ODOP को रोजगारोन्मुख और निर्यात-आधारित मॉडल के रूप में सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महावीर जयंती पर श्रमण मुनि श्री 108 संभव सागर जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया

भोपाल : सोमवार, मार्च 30, 2026, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महावीर जयंती पर श्रमण मुनि श्री 108 संभव सागर जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के दिगंबर एवं श्वेतांबर जैन समाज द्वारा संयुक्त तत्वावधान में निकाली जा रही भगवान महावीर स्वामी की शोभायात्रा का इतवारा पहुंचकर स्वागत कर यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुनि श्री 108 संभव सागर जी महाराज सहित अन्य मुनिगण को श्रीफल भेंट कर उनका अभिवादन किया। इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप, प्रदेश महामंत्री श्री राहुल कोठारी, दिगम्बर पंचायत कमेटी के अध्यक्ष श्री पंकज जैन, सुपारी और श्वेताम्बर समाज के अध्यक्ष श्री राजेश तांतेड़ उपस्थित थे।

दूसरे आरक्षित वर्गों की तरह EWS वर्ग के लिए सरकार द्वारा योजनाएं क्यों नहीं है ??

“अगर हम वास्तव में ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाना चाहते हैं,
तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि
देश का हर गरीब—चाहे वह किसी भी वर्ग का हो—
उद्यम लगाने के लिए आवश्यक पूंजी और अवसर पा सके।”

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