
कड़ी युद्ध में ५०००० हजार से अधिक ड्रोन तथा मिसाइल दागी गई , इजराइल अमेरिका इरान तथा अरब रास्त्रो को ४९ लाख करोड़ का नुकशान
केरल ,असं तथा पांडिचेरी में आज मतदान परिणाम ४ मई को |
बंगाल में ९१ लाख मतदाताओ के नाम कटे मतदाताओ की सूचि भी उपल्लाब्द्ध नहीं |
देश में परजातंत्र जनमद तथा संवेधानिक्क व्य्वाश्ताओ की हत्या |
भारत की विदेस निति फ्लाप |
अस्थाई युद्ध विराम में अनेक पेज इजराइल युद्धविराम तोड़ने की हालत में लेबनान में हमले कर रहा |
युद्धविराम को मानाने हेतु ट्रंप नेत्य्नौं पर दबाव दल रहे |
हर्मुज पर ईरान का अद्धिकार रहेगा ओमान भी रहेगा जहाजो से टैक्स वसूलेगा |
ईरान पर irgc पर पूरा नियंतरण रहेगा |
ईरान इस्लामिक गणराज्य तथा इसलामिक नाटो बनाए हेतु सक्रिय |
अमेरिका पर तरंप की विदाई तय उप्रस्त्र्पति वोन होसक्तेहे नए रस्त्पति कड़ी युद्ध के कारन समूचे विश्व में मंहगाई की मर कूद आयल के भाव में ६ पर्स्तिसत की कमी तजा भाव ९५ डॉलर प्रति बेरल
भारत में पेट्रोल ,दिसल तथा गेस पर सभी प्रकार के टेक्स समाप्त किए जय |
एसा करने से जनता को रहत होगी १० अप्रेल की युध्ह विराम बैठक जो इसलामाबाद में होगी उसमे रस्त्संघ की मद्य्सता जरुरी ताकि स्थाई युद्ध विराम हो सके बैठक में इजराइल अरब रात्र ईरान तथा अमेरिक के पर्तिनिधि भी जरुरी

उज्जैन। जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आज किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने किसानों के हक में आवाज बुलंद करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
कार्यक्रम में किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान, जिले के प्रभारी चंदर सिंह सोंधिया, जिला अध्यक्ष एवं तराना विधायक महेश परमार, विधायक दिनेश जैन ‘बॉस’ तथा शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
धरना स्थल पर नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में किसान अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, समर्थन मूल्य पर खरीदी में देरी हो रही है और भुगतान में भी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। इन मुद्दों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना आवश्यक हो गया है।
नेताओं ने कहा कि यदि जल्द ही किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी आंदोलन को और व्यापक रूप देगी। कार्यक्रम के अंत में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर किसानों की मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की।
धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान एवं कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने एकजुट होकर किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।

उज्जैन : बुधवार, अप्रैल 8, 2026 उज्जैन,08 अप्रैल। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री श्रेयांस कूमट ने बुधवार सुबह पंचक्रोशी यात्रा के पड़ाव एवं उप-पड़ाव के समस्त झोनल अधिकारी, नोडल अधिकारी तथा सहायक नोडल अधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी पंचक्रोशी यात्रा की सम्पूर्ण व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।
बैठक में लोक निर्माण विभाग एवं प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक के संबंध में तथा लोक स्वास्थय यांत्रिकी विभाग को पड़ाव/उप-पड़ाव की पानी की टंकी की साफ सफाई तथा पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने के एवं विद्युत विभाग को मार्ग पर प्रकाश की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत उज्जैन और घट्टिया, महिला बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग को पंचक्रोशी यात्रा अंतर्गत समस्त व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर श्री सिंह ने नगरीय निकायों की मासिक समीक्षा बैठक ली
ज्जैन : बुधवार, अप्रैल 8, 2026 उज्जैन,08 अप्रैल। कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह ने बुधवार को प्रशासनिक संकुल भवन के सभाकक्ष में नगरीय निकायों की मासिक समीक्षा बैठक ली।बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा के दौरान जो आवास अपूर्ण है जिनमें छत और लेंटिल निर्माण लंबित है उन्हें एक माह में पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही जो आवास अप्रारंभ है उनमें प्रगति लाने के निर्देश दिए गए।बड़नगर में पूर्ण आवासों का प्रतिशत निर्धारित लक्ष्यानुसार 93.64 प्रतिशत था। इसे शत प्रतिशत करने के निर्देश दिए गए। पीएम आवास शहरी 2.0 की समीक्षा के दौरान कलेक्टर श्री सिंह ने निर्देश दिए कि आवास के हितग्राहियों के सत्यापन के शेष प्रकरणों को जल्दी निराकृत करें। विशेष निधि के अंतर्गत जो निर्माण कार्य है उनमें टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर शीघ्र कार्य प्रारंभ करें।कलेक्टर श्री सिंह द्वारा एम.आर.एफ. (ड्राय वेस्ट, वेट वेस्ट) के निष्पादन की निकायवार जानकारी प्राप्त की गई। ग्रीन स्पेस योजना के अंतर्गत बगीचे निर्माण में तराना में शीघ्र कार्य पूर्ण करवाने के निर्देश दिए गए। पेयजल आपूर्ति अमृत 2.0 के अंतर्गत नागदा में पाइपलाईन बिछाने का कार्य चल रहा है। इसे शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। बडनगर में ओएचटी तथा माकडौन में पानी की टंकी का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है।मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना के अंतर्गत नगरीय निकायवार विभिन्न वार्डों में सीसी रोड और आरसीसी नाली के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर श्री सिंह ने निर्देश दिए कि यह सभी कार्य तेज गति से पूर्ण किए जाए। उनके द्वारा निर्माण कार्यों के भ्रमण के दौरान उन्हें कार्यों की प्रगति से अवगत कराया जाए। कायाकल्प अभियान फेज-2 के अंतर्गत सीसी रोड निर्माण की बैठक में समीक्षा की गई। पेयजल आपूर्ति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि नागदा में प्रतिदिन नल के माध्यम से पेयजल सप्लाय किया जा रहा है। बड़नगर खाचरौद, महिदपुर और तराना में भी नियमित रूप से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। सभी घरों में नल से पेयजल प्रदाय किया जा रहा है। कलेक्टर श्री सिंह ने निर्देश दिए कि पेयजल पाइपलाईन के जो नए कनेक्शन दिए जाने है उनमें इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि सीवर कनेक्शन और पेयजल कनेक्शन की लाईन अलग-अलग और एक दूसरे से दूर रहें।हितग्राहियों की ई-केवाईसी की समीक्षा के दौरान कलेक्टर श्री सिंह ने निर्देश दिए कि एक माह कें अंदर नगरीय निकायों में सभी हितग्राहियों की ई-केवाईसी शत प्रतिशत पूर्ण कराई जाए। अमृत हरित योजना के अंतर्गत सभी निकायों में पौधा रोपण का प्रतिशत कम पाए जाने पर कलेक्टर श्री सिंह ने इसे बढ़ाने के निर्देश दिए। पौधा रोपण के पश्चात उसकी सतत देखभाल की जाए। सड़कों के किनारे और डिवाईडर पर छायादार वृक्ष लगाए जाए। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सभी नगरीय निकाय अलग-अलग कार्य योजना बनाए। सभी भवनों और शासकीय कार्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना सुनिश्चित किया जाए। पूराने जल स्त्रोतों का जीर्णोद्धार और साफ-सफाई नियमित रूप से की जाए।सीएम हेल्पलाई में 300 दिवस से अधिक लंबित शिकायतों का शीघ्र निराकरण करें। सभी नगरीय निकायों में जल कर संपत्तिकर की वसूली के लिए अपना दायरा बढ़ाए। विशेष अभियान चलाकर प्रतिवर्ष इसमें सुधार किया जाए।बैठक में परियोजना अधिकारी जिला नगरीय विकास अभिकरण श्री अरुण शर्मा और समस्त सीएमओ उपस्थित थे।

भोपाल : बुधवार, अप्रैल 8, 2026
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘वन्दे मातरम्’ के रचयिता, राष्ट्र की चेतना को जागृत करने वाले महान साहित्यकार स्व. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा किस्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों का महामंत्र रहा ‘वन्दे मातरम्’ आज 100 वर्षों के बाद ‘विकसित भारत’ के निर्माण को भी नई दिशा और शक्ति दे रहा है।देश व समाज की समृद्धि के लिए स्व. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव अनुकरणीय रहेगा।

भोपाल : बुधवार, अप्रैल 8, 2026
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माँ भारती के अमर सपूत, महान स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे के बलिदान दिवस पर उनका पुण्य स्मरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वीर मंगल पांडे ने अंग्रेजी हुकूमत को जिस तेवर और ताकत से ललकारा, उससे हर भारतीय का स्वाभिमान जागृत, 1857 की क्रांति की ज्वाला घर-घर तक पहुंची। उनका बलिदान राष्ट्र के लिए निर्भीक, कर्तव्यनिष्ठ और समर्पित रहने का संदेश देता है।

रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर हुई 5,200 किमी
देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क
डबल इंजन सरकार का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा मध्यप्रदेश
बेहतर रेल संपर्क से अगले दो सालों में अर्थ-व्यवस्था में आएगा बदलाव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का परिणाम, केंद्र से मिला सहयोग
भोपाल : बुधवार, अप्रैल 8, 2026,
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अथक प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश ‘डबल इंजन सरकार’ का एक शानदार उदाहरण बनकर उभरा है। अब प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और रेल कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले शीर्ष दस राज्यों में से एक है। रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का 7.6% है। बेहतर रेल सेवाओं के माध्यम से देश के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मध्यप्रदेश के लिए आवंटित रेलवे बजट में 24 गुना वृद्धि हुई है। इस वर्ष 15,188 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2009 से 2014 तक, वार्षिक बजट केवल 632 करोड़ रुपये था। वर्तमान में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेल परियोजनाएँ अलग-अलग चरणों में चल रही हैं।
आर्थिक विकास में आयेगी तेजी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केंद्र सरकार ने कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे राज्य को आर्थिक परिवर्तन की गति तेज करने में मदद मिली है। इस प्रगति का श्रेय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच गहरी आपसी समझ और समन्वय को जाता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जबलपुर-गोंदिया रेलवे लाइन और इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन के दोहरीकरण, तथा सिंहस्थ कुंभ मेला : 2028 के संदर्भ में अन्य अधोसंरचना विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना में छह स्टेशनों – कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम – पर पुनर्विकास का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पूरे राज्य में 74 स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। यात्रियों के लिये 3,163 करोड़ रुपये की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही है। वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के लिए वरदान साबित हुई हैं। इनमें भोपाल-नई दिल्ली, इंदौर-नागपुर, भोपाल-रीवा और खजुराहो-बनारस शामिल हैं। इंदौर और भोपाल में 2 मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं, जिनसे शहरी आबादी को राहत मिली है। रायसेन ज़िले के उमरिया गाँव में 1800 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रेल कोच निर्माण इकाई बनाई जा रही है। इससे 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा।
बड़े राज्यों में सीधा संपर्क
जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। इससे पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में 5,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया गया है। कान्हा नेशनल पार्क और धुआँधार जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे जबलपुर सहित मण्डला, सिवनी और बालाघाट जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा। कोयला, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न और उर्वरक के परिवहन में तेजी आयेगी। उद्योगों के लिये मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन 18,036 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से बनाई जा रही है। इन रेलवे प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश को बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन धार, खरगौन और बड़वानी जिलों को सीधा लाभ होगा। कृषि और व्यापार बढ़ेगा। बाजरा और अनाज उत्पादक जिलों की पहुँच बड़े बाजारों तक बनेगी। उज्जैन और ओंकारेंश्वर जैसे धार्मिक महत्व के शहरों से सम्पर्क बढ़ेगा। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, 3 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। रीवा से पुणे (जबलपुर और सतना होते हुए), जबलपुर से रायपुर (नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए), और ग्वालियर से बेंगलुरु (गुना और भोपाल होते हुए)। ये सेवाएँ कनेक्टिविटी को और भी बेहतर बनाएँगी।
केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2 बड़े कमर्शियल हब-मुंबई और इंदौर – के बीच 309 किलोमीटर लंबी एक नई रेलवे लाइन को भी मंज़ूरी दी है। इन कमर्शियल केंद्रों को जोड़ने के अलावा, यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के उन क्षेत्रों को भी जोड़ेगा जहाँ अभी रेलवे कनेक्टिविटी नहीं है। यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र के 2 ज़िलों और मध्यप्रदेश के 4 ज़िलों से होकर गुज़रेगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये है, और यह 2028-29 तक पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। एकीकृत योजना के माध्यम से, यह यात्रा को आसान बनायेगा। सामान और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह को संभव बनाएगा।
यह परियोजना महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को कवर करेगी। इसमें 30 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे बड़वानी जैसा आकांक्षी जिला भी रेलवे कनेक्टिविटी से लाभान्वित होगा। लगभग 1,000 गांवों और लगभग 30 लाख लोगों को रेलवे कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट गेटवे पोर्ट और अन्य बंदरगाहों को पीथमपुर ऑटो क्लस्टर औद्योगिक केंद्र से भी जोड़ेगी। इस क्लस्टर में 90 बड़े उद्योग और 700 छोटे और मध्यम उद्यम हैं। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना मध्यप्रदेश के बाजरा उत्पादक जिलों को महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों से जोड़ेगी, जिससे इन उत्पादों का देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों तक परिवहन आसान हो जाएगा।
नई परियोजनाओं की शुरूआत
भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन से राजगढ़ और भोपाल का सीधा संपर्क राजस्थान में हो जायेगा। इस 276 किमी लाइन में से 169 किमी पर काम पूरा हो गया है। इससे व्यापार, खेती और आम नागरिकों को सुविधा होगी। इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी रेललाइन को मंजूरी मिल चुकी है।
वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां 145 कि.मी. नई रेल पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 29 कि.मी. प्रति वर्ष रहा वहीं 2014 से 2025 तक, 2,651 कि.मी. नई पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 241 कि.मी. प्रति वर्ष रहा, जो कि लगभग 8 गुना ज़्यादा है।
वर्तमान में, 4,740 किमी के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी अनुमानित लागत 89,543 करोड़ रूपये है। ये प्रोजेक्ट्स विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। अब तक 2,092 किमी पर काम पूरा हो चुका है, जिस पर 41,401 करोड़ रूपये खर्च हुए हैं।


यह उस समय की बात है जब मुंशी प्रेमचंद महज़ 15-16 वर्ष के थे। उम्र छोटी थी, लेकिन जिम्मेदारियाँ बहुत बड़ी। पिता का साया सिर से उठ चुका था और घर की पूरी जिम्मेदारी उनके नाजुक कंधों पर आ गई थी। घर में एक सौतेली माँ, उनके दो छोटे बच्चे और स्वयं प्रेमचंद—एक ऐसा परिवार जो हर दिन संघर्ष के सहारे जी रहा था।
गरीबी इतनी गहरी थी कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी किसी युद्ध से कम नहीं था।
लेकिन इस अभाव के बीच भी एक चीज़ थी जो प्रेमचंद को जीवित रखे हुए थी—ज्ञान की प्यास।
अपनी परिस्थितियों से हार मानने के बजाय, मुंशी प्रेमचंद ने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया। वे एक वकील साहब के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जाते थे। जो कुछ मामूली पैसे मिलते, उसी से घर का चूल्हा जलता।
दिनभर की भागदौड़, जिम्मेदारियों का बोझ और ऊपर से खाली पेट—
यह सब उनके जीवन का हिस्सा बन चुका था।
एक शाम, ट्यूशन पढ़ाकर लौटते वक्त उनकी जेब में सिर्फ दो आने थे।
पूरा दिन उन्होंने कुछ नहीं खाया था। भूख अपने चरम पर थी।
तभी रास्ते में एक पुरानी किताबों की दुकान पर उनकी नजर पड़ी।
एक किताब… पुरानी, साधारण, लेकिन उनके लिए अनमोल।
अब उनके सामने एक कठिन सवाल खड़ा था—
👉 रोटी या किताब?
एक तरफ शरीर की भूख थी…
दूसरी तरफ आत्मा की प्यास।
कुछ क्षणों के विचार के बाद उन्होंने जो फैसला लिया, वही उन्हें “प्रेमचंद” बनाता है।
उन्होंने उन दो आनों से रोटी नहीं, किताब खरीदी।
जब वे घर पहुँचे, तो भूख से उनकी हालत बेहद खराब थी।
लेकिन घर में भी कुछ नहीं था—चूल्हा उस दिन जला ही नहीं था।
उस रात मुंशी प्रेमचंद खाली पेट सो गए।
लेकिन इस कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि—
उन्होंने बाद में अपनी डायरी में लिखा—
“उस रात भूख की पीड़ा तो थी,
लेकिन हाथ में किताब होने का जो सुकून था,
वह उस भूख से कहीं बड़ा था।”
यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि एक लेखक की आत्मा की आवाज़ है।
प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई ने ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ नाम से एक संस्मरण लिखा है।
उसमें एक तस्वीर का जिक्र आता है—
जिसमें मुंशी प्रेमचंद अपनी पत्नी के साथ खड़े हैं, और उनके पैर में पहना जूता फटा हुआ है। इतना कि उँगली बाहर दिखाई दे रही है।
उस दौर में लोग फोटो खिंचवाने के लिए उधार के कपड़े और जूते पहन लेते थे,
लेकिन प्रेमचंद ने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने अपनी सच्चाई को छिपाने की कोशिश नहीं की।
👉 उनका मानना था—
“जैसा मैं भीतर हूँ, वैसा ही बाहर भी रहूँ।”
यह सिर्फ सादगी नहीं, बल्कि गहरा आत्मसम्मान था।
मुंशी प्रेमचंद का जीवन हमें यह सिखाता है कि महानता कभी भी बाहरी आडंबरों से नहीं आती।
न महंगी गाड़ियाँ…
न ब्रांडेड कपड़े…
बल्कि महानता उस जज्बे में होती है—
जो भूख सहकर भी अपने सपनों को जिंदा रखता है।
आज जब हम छोटी-छोटी असुविधाओं पर शिकायत करते हैं,
तो प्रेमचंद का यह संघर्ष हमें आईना दिखाता है।
👉 अगर इरादे मजबूत हों,
तो अभाव भी आपको महान बनने से नहीं रोक सकते।
कलम के उस सच्चे सिपाही को नमन—
जिसने अपनी भूख से बड़ा ज्ञान को माना,
और अपनी सादगी से पूरी दुनिया को समृद्ध कर दिया।
मुंशी प्रेमचंद सिर्फ एक लेखक नहीं थे—
वो संघर्ष की जीवित परिभाषा थे।