एमपी ई-सेवा’ से डिजिटल गवर्नेंस को मिला सशक्त आधार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

56 विभागों की 1700 सेवाएँ एक ही पोर्टल पर उपलब्ध
सेवा वितरण प्रणाली हुई अधिक जवाबदेह एवं सुव्यवस्थित

भोपाल : शनिवार, अप्रैल 18, 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप’ के माध्यम से प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस को सशक्त आधार मिला है। इससे नागरिक सेवाएँ अब अधिक सरल, सुगम और सुलभ हुई हैं। डिजिटल तकनीक आज सुशासन की आधारशिला बन चुकी है और प्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए देश में नई पहचान स्थापित कर रहा है। अब प्रदेशवासियों को विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक ही मंच पर सभी सुविधाएँ सहज, त्वरित और पारदर्शी रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल से सेवा वितरण प्रणाली अधिक जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनी है। साथ ही नागरिकों के समय एवं संसाधनों की बचत सुनिश्चित हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एकीकृत नागरिक सेवा मंच 56 विभागों की 1700 से अधिक सरकारी सेवाओं और योजनाओं को एक ही डिजिटल विंडो पर उपलब्ध करा रहा है। वर्ष 2026 तक 100 प्रतिशत ई-सेवा डिलीवरी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) के सेंटर फॉर एक्सीलेंस द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म नागरिकों, विभागों एवं सेवाओं को एकीकृत डिजिटल इको-सिस्टम में जोड़ते हुए सुशासन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

एकीकृत पोर्टल पर सभी सेवाएँ: प्रक्रिया हुई सरल

एमपी ई-सेवा पोर्टल पर विभिन्न विभागों की 1700 सेवाओं को एकीकृत कर नागरिकों को बार-बार अलग-अलग पोर्टल पर जाने और दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता समाप्त की गई है। नागरिक अब eseva.mp.gov.in और मोबाइल ऐप के माध्यम से पात्रता जांच, आवेदन, स्टेटस ट्रैकिंग और अनुमोदन जैसी सभी सुविधाएँ एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर आधार आधारित प्रमाणीकरण, ई-साइन और डिजिटल प्रमाणपत्र की व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और फेसलेस बनाई गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है।

समग्र पोर्टल से एकीकरण: ऑटो-वेरिफिकेशन की सुविधा

‘एमपी ई-सेवा’ को समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के समग्र पोर्टल से जोड़ा गया है। प्रत्येक परिवार को 8 अंकीय परिवार आईडी और हर सदस्य को 9 अंकीय सदस्य आईडी दी गई है। इससे ऑटो-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को सक्षम बनाया गया है। इससे पात्रता निर्धारण स्वतः हो जाता है और अनावश्यक देरी व दोहराव समाप्त होता है। पोर्टल की प्रमुख विशेषता ‘ऑटो-फेचिंग डॉक्युमेंट्स’ है, जिससे नागरिकों को बार-बार दस्तावेज़ अपलोड करने की आवश्यकता नहीं रहती।एक बार अपलोड किए गए दस्तावेज आगे की सेवाओं में स्वतः उपलब्ध हो जाते हैं।

सुगम, सुरक्षित एवं नागरिक केंद्रित ‘ऐप-डिज़ाइन’

एमपी ई-सेवा पोर्टल को मोबाइल-फर्स्ट दृष्टिकोण के साथ विकसित किया गया है। इसमें बहुभाषीय सुविधा के साथ दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष डिज़ाइन किया गया है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के नागरिक आसानी से इसका उपयोग कर सकें। प्लेटफ़ॉर्म पर अब तक 2 लाख 14 हजार से अधिक ट्रांसेक्शन दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 3 हजार 446 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि 1 लाख 64 हजार 600 से अधिक ट्रैक/डाउनलोड गतिविधियाँ और 45 हजार 954 समग्र पात्रता जांचें की गई हैं।डिजिटल गवर्नेंस में प्रदेश की सशक्त उपस्थिति

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन (एनईएसडीए) 2025 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश ने 1752 ई-सेवाओं को मैप कर सभी 56 अनिवार्य विभागीय सेवाओं को 100 प्रतिशत एकीकृत करते हुए देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया।प्रदेश को ‘सायबर तहसील’ के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार तथा ‘संपदा 2.0’ के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं, जो डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों को दर्शाते हैं।

साधना सप्ताह में मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग का उत्कृष्ट प्रदर्शन

iGOT पोर्टल पर अधिकतम पाठ्यक्रम पूर्ण करने पर राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त किया तीसरा एवं प्रदेश स्तर पर हासिल किया दूसरा स्थान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव 21 अप्रैल को सिविल सर्विस डे पर उच्च शिक्षा विभाग को करेंगे पुरस्कृत

भोपाल : शनिवार, अप्रैल 18, 2026

साधना सप्ताह में मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन के नेतृत्व में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विभाग ने iGOT पोर्टल पर अधिकतम पाठ्यक्रम पूर्ण करने के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा एवं प्रदेश स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। विभाग की इस उपलब्धि पर अब 21 अप्रैल को सिविल सर्विस डे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सम्मानित किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री राजन पुरस्कार ग्रहण करेंगे।

भारत सरकार द्वारा अधिकारियों-कर्मचारियों में ज्ञान, कौशल और क्षमता विकास को लेकर मिशन कर्मयोगी अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत देश के सभी राज्य, केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी के तहत 2 अप्रैल से 10 अप्रैल तक (राष्ट्रीय सीखे सप्ताह) का आयोजन किया गया। इस दौरान iGOT पोर्टल पर अधिकतम पाठ्यक्रम पूर्ण करने के मामले में मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह साधना सप्ताह अंतर्गत राज्य स्तर पर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 10 हजार से अधिक लोकसेवकों की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग श्री राजन ने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा एवं प्रदेश स्तर पर दूसरा स्थान हासिल करने पर विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों, कर्मचारियों की लगन, मेहनत एवं समर्पण भाव से किए गए कार्य की वजह से विभाग ने राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर पर यह उपलब्धि हासिल की हैं।

10वीं-12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा का मिलेगा मौका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अनुपस्थित, अनुत्तीर्ण और अंक सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी ले सकेंगे लाभ
22 अप्रैल तक किया जा सकेगा आवेदन
7 से 25 मई तक आयोजित होगी परीक्षा

भोपाल : शनिवार, अप्रैल 18, 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के परिणामस्वरूप प्रदेश के बच्चों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। शासकीय स्तर पर की गई पहल के साथ-साथ यह उपलब्धि विद्यार्थियों और शिक्षकों की कड़ी मेहनत का प्रमाण भी है। इस वर्ष किसी भी छात्र का परीक्षाफल पूरक घोषित नहीं किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब विद्यार्थियों के लिए द्वितीय परीक्षा आयोजित की जा रही है। जो विद्यार्थी अनुपस्थित रहे, अनुत्तीर्ण हुए या अंक सुधारना चाहते हैं, वे निराश न हों, सरकार उनके साथ खड़ी है। “द्वितीय अवसर परीक्षा” 7 से 25 मई तक आयोजित होगी। राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को पिछली बार से अधिक परिश्रम और बेहतर करने के लिए एक मौका और दिया गया है। अनुत्तीर्ण हुए बच्चों के माता-पिता को ऐसे मौके पर अपने बच्चे के साथ खड़े होने और उन्हें हौसला देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि आज की असफलता से निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। जीवन की राह में छोटी-मोटी असफलताएं हमें और अधिक मजबूत बनाने के लिए आती है। गिरकर संभलने वाला ही असली विजेता कहलाता है।

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की जा रही द्वितीय अवसर परीक्षा में ऐसे छात्र जो मंडल की प्रथम परीक्षा में एक या अधिक विषयों में अनुपस्थित/अनुत्तीर्ण रहे हों, सम्मिलित हो सकेंगे। ऐसे परीक्षार्थी जो किसी विषय में उत्तीर्ण हो गए हों, वे भी अंक सुधारने के लिए द्वितीय अवसर परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। परीक्षार्थियों का प्रथम एवं द्वितीय अवसर में से जो भी श्रेष्ठ परिणाम होगा, वह अंतिम रूप से मान्य रहेगा। प्रायोगिक विषयों में किसी छात्र को प्रायोगिक और आंतरिक परीक्षा के केवल अनुत्तीर्ण भाग में शामिल होने की पात्रता होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में परीक्षार्थी को विषय परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन 22 अप्रैल रात 12 बजे तक एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भरे जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाले देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में प्राइमरी स्तर पर ‘ड्रॉप आउट रेट’ शून्य (Zero) हो गया है। प्रदेश में 369 सर्वसुविधायुक्त सांदीपनी विद्यालय और 730 पीएम श्री स्कूल, शालेय शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। शिक्षा के लिए बजट में 36 हज़ार 730 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष से 11% अधिक है। यह निवेश अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर 8 लाख 50 हज़ार से अधिक बच्चों की फीस राज्य सरकार भर रही है, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहे।

जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्राम सरवना (उन्हेल) में दीवार लेखन करवाया गया

उज्जैन : शुक्रवार, अप्रैल 17, 2026

उज्जैन 17 अप्रैल। उज्जैन मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, विकासखंड खाचरौद, सेक्टर उन्हेल के अंतर्गत नवांकुर संस्था सरवना उन्हेल द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत ग्राम सरवना में दीवार लेखन करवाया गया।इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों में जल संरक्षण, जल संवर्धन तथा जल के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना है। दीवार लेखन के माध्यम से जल शक्ति से नव भक्ति का संदेश दिया गया, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रारंभ किए गए राज्यव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान का हिस्सा है।नवांकुर संस्था सरवना उन्हेल के सदस्यों तथा स्थानीय ग्रामवासियों ने इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की। दीवार लेखन में जल स्रोतों के संरक्षण, उनकी स्वच्छता, भू-जल स्तर सुधार तथा भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने संबंधी संदेश प्रमुखता से उकेरे गए।यह गतिविधि जन अभियान परिषद की स्वैच्छिकता, सामूहिकता और स्वावलंबन की भावना को मजबूत करती है तथा ग्राम स्तर पर जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में सहायक सिद्ध होगी।नवांकुर संस्था सरवना उन्हेल के समन्वयक एवं सदस्यों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से हम ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। आगे भी अभियान के अंतर्गत श्रमदान, जल मंदिर निर्माण, पौधारोपण जैसी गतिविधियां निरंतर चलाई जाएंगी।

आज के अति महत्वपूर्ण समाचार

परिसीमन पर सियासत तेज, वैश्विक मोर्चे पर युद्ध विराम के बीच कूटनीति का नया दौर

नई दिल्ली। देश की राजनीति में परिसीमन (Delimitation) को लेकर घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने साफ कहा है कि 2027 की जनगणना से पहले किसी भी प्रकार का परिसीमन स्वीकार्य नहीं होगा। उनका तर्क है कि बिना ताजा आंकड़ों के निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

विपक्षी नेताओं ने यह भी मांग रखी कि परिसीमन आयोग के गठन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इसमें किसी एक दल का वर्चस्व न हो। आयोग के गठन को लेकर दो-स्तरीय व्यवस्था—केंद्रीय और राज्य स्तर—की भी बात सामने आई है, जिससे संतुलन बना रहे।


वैश्विक स्तर पर युद्ध विराम, लेकिन सवाल बरकरार

दूसरी ओर, मध्य-पूर्व में लेबनान और इजराइल के बीच 10 दिन का युद्ध विराम लागू हुआ है। इस घटनाक्रम के पीछे कूटनीतिक दबाव को अहम माना जा रहा है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि शांति वार्ता सफल होगी और युद्ध विराम आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि, उनके इस बयान पर संदेह भी जताया जा रहा है, खासकर ईरान से जुड़े दावों को लेकर।

सूत्रों के मुताबिक, ईरान, अमेरिका और अन्य देशों के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी जारी है, जिसमें पाकिस्तान भी एक मध्यस्थ की भूमिका में नजर आ रहा है।


हार्मुज और प्रतिबंधों पर नई चर्चा

हार्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति दिलचस्प बनी हुई है। खबरें हैं कि यहां से नाकेबंदी हटाने और ईरान को नियंत्रण बनाए रखने की बात हो रही है। साथ ही, अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और उसकी जब्त संपत्ति लौटाने जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह सहमति बनती है, तो यह पूरे क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम होगा।


अमेरिका-इजराइल संबंधों में खिंचाव

इसी बीच, अमेरिका द्वारा इजराइल को सैन्य सहायता देने में अनिच्छा दिखाने की खबरों ने दोनों देशों के रिश्तों में हल्का तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है और रक्षा मंत्री की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


देश में सियासी वार-पलटवार जारी

देश के भीतर भी राजनीतिक माहौल गर्म है। महिलाओं की सुरक्षा, योजनाओं के क्रियान्वयन और संसद के विशेष सत्र में हुए खर्च को लेकर सरकार पर निशाना साधा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने समय रहते फैसले नहीं लिए, जिससे हालात बिगड़े।


नई राजनीतिक व्यवस्था का प्रस्ताव

इस बीच एक नई राजनीतिक सोच भी सामने आई है—“लोकप्रिय सरकार” का विचार। इसके तहत सभी दलों को उनकी ताकत के अनुसार सरकार में भागीदारी देने की बात कही गई है। साथ ही, सबसे बड़े दल का प्रधानमंत्री और दूसरे नंबर के दल का उपप्रधानमंत्री बनाने का सुझाव दिया गया है।

महान गणितज्ञ पंडित आर्यभट्ट

भारत प्राचीन समय से ही ज्ञान और विज्ञान का केंद्र रहा है। यहां कई महान विद्वान हुए, जिन्होंने पूरी दुनिया को नई सोच दी। उन्हीं महान लोगों में एक नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है—आर्यभट्ट। वे एक ऐसे गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे, जिनकी खोजों ने दुनिया को बदल दिया।

आर्यभट्ट कौन थे?

आर्यभट्ट का जन्म लगभग 476 ईस्वी में हुआ माना जाता है। वे बहुत ही बुद्धिमान और जिज्ञासु थे। बचपन से ही उन्हें गणित और तारों-ग्रहों के बारे में जानने में रुचि थी। कहा जाता है कि उन्होंने पाटलिपुत्र (आज का पटना) में शिक्षा प्राप्त की और वहां के विद्वानों के बीच रहकर बहुत कुछ सीखा।

उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक

आर्यभट्ट ने एक बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक लिखी, जिसका नाम “आर्यभटीय” है। इसमें उन्होंने गणित और खगोलशास्त्र की कई कठिन बातों को आसान तरीके से समझाया। यह किताब आज भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

गणित में उनका योगदान

आर्यभट्ट ने गणित को समझने का तरीका बदल दिया। उन्होंने संख्याओं को लिखने और समझने की नई विधि बताई। उन्होंने पाई (π) का मान भी बहुत सही निकाला, जो आज भी लगभग वैसा ही माना जाता है।

उन्होंने त्रिकोणमिति (जैसे साइन या ज्या) की शुरुआत की, जो आज इंजीनियरिंग, विज्ञान और तकनीक में बहुत काम आती है।

खगोलशास्त्र में खोज

आर्यभट्ट ने एक बहुत बड़ी बात कही—उन्होंने बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, जिससे दिन और रात होते हैं। उस समय लोग मानते थे कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, लेकिन उन्होंने इस सोच को बदल दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि सूर्य और चंद्र ग्रहण किसी चमत्कार से नहीं, बल्कि छाया के कारण होते हैं। यह बात उस समय के लिए बहुत नई और वैज्ञानिक थी।

उनकी सोच क्यों खास थी?

आर्यभट्ट हर चीज को तर्क और प्रमाण से समझते थे। वे अंधविश्वास में विश्वास नहीं करते थे। उनकी सोच यह थी कि हर बात को समझने के लिए हमें सवाल पूछना चाहिए और सही जवाब खोजने चाहिए।

दुनिया पर प्रभाव

आर्यभट्ट का ज्ञान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। उनकी किताबों का अनुवाद दूसरी भाषाओं में हुआ और उनके विचार पूरी दुनिया में फैले। कई विदेशी वैज्ञानिकों ने भी उनके काम से सीखा।

आज के समय में महत्व

आज भी हम जो गणित पढ़ते हैं और अंतरिक्ष के बारे में जो जानते हैं, उसमें कहीं न कहीं आर्यभट्ट का योगदान है। भारत ने अपने पहले उपग्रह का नाम भी उनके सम्मान में “आर्यभट्ट” रखा।

हमें क्या सीख मिलती है?

आर्यभट्ट का जीवन हमें सिखाता है कि:

  • हमें हमेशा सीखते रहना चाहिए
  • सवाल पूछने से डरना नहीं चाहिए
  • मेहनत और लगन से हम बड़ी सफलता पा सकते हैं