उज्जैन-१९ अगस्त २०२६ को मोहन यादव ,१०ब्जे कंठाल पहुचे| निर्मामो का निरीक्षण करना था , नहीं किया|भाजपाई चिंटू ही उन्हें घेरे रहे ,जनता से कोई संवाद तक नहीं किया|बीच में धक्का मुक्की भी होती रही|| सीम नें भी अनुशासन बनाने तक की अपील भी नहीं की| ये निरीक्षण तथा या दिखावा| सीम ने सराफा तक जाना उचित नहीं समझा| आदमी अंहकार में सब कुछ भूल जाता हें| जो भी हो , नाटक तो हो ही गया, मीडिया के रोचक्स्ह्क रंगौर नाटक भी देखने को मिले| विधायक भी अपना सम्मान कराते नजर आये| सच बेहद अप्रिय ही होता हें| मोहनजी याद रखना , जो भीड़ हें ना , उसके हाथो में पंख कतरने की केंची भी हें हाथ में
सीएम डा मोहन यादव का स्वागत,अनुशासन नदारद रहा





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