सिंहस्थ से पहले उज्जैन-झालावाड़ बनेगा मेगा फोरलेन, 2721 करोड़ के टेंडर जारी

160 किमी लंबे मेगा कॉरिडोर से मालवा-हाड़ौती की कनेक्टिविटी होगी मजबूत, दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से भी मिलेगा सीधा जुड़ाव

उज्जैन। सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन और राजस्थान के झालावाड़ के बीच सड़क संपर्क की तस्वीर बदलने जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-552जी को फोरलेन बनाने के लिए 2721.72 करोड़ रुपए की लागत वाली महत्वाकांक्षी परियोजना के टेंडर जारी कर दिए हैं। करीब 160 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण से मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच आवागमन तेज, सुरक्षित और सुगम होगा।

परियोजना को दो पैकेजों में विभाजित किया गया है। पहले पैकेज में खिलचीपुरा गांव से आकली-काड़िया तक 86.5 किलोमीटर सड़क का फोरलेन निर्माण किया जाएगा, जिस पर 1462.19 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहीं दूसरे पैकेज में आकली-काड़िया से राजस्थान के झालावाड़ स्थित एनएच-52 जंक्शन तक 72.763 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा। इस हिस्से की लागत 1259.53 करोड़ रुपए आंकी गई है।

दोनों पैकेज ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड पर विकसित किए जाएंगे। निर्माण एजेंसियों को कार्य पूरा करने के लिए 730 दिन यानी दो वर्ष का समय दिया जाएगा। इसके बाद पांच वर्षों तक मार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी की होगी।

छह फ्लाइओवर, 115 अंडरपास और बड़े पुल बनेंगे

एनएचएआई की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार पूरे कॉरिडोर पर छह फ्लाइओवर, 115 व्हीकल अंडरपास और कई बड़े पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के सामने भी फ्लाइओवर बनाया जाएगा। इसके अलावा सुरक्षित कट पॉइंट और आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

वर्तमान में यह मार्ग कई स्थानों पर संकरा और दुर्घटना संभावित है। लगातार होने वाले हादसों के कारण इसे क्षेत्र की “हत्यारी सड़क” के रूप में भी पहचान मिली हुई है।

मध्यप्रदेश में 133 किमी और राजस्थान में 27 किमी सड़क का होगा उन्नयन

परियोजना के तहत मध्यप्रदेश सीमा में लगभग 133 किलोमीटर और राजस्थान सीमा में करीब 27 किलोमीटर सड़क का उन्नयन किया जाएगा। उज्जैन नगर सीमा से घोंसला तक पहले से निर्मित 27 किलोमीटर फोरलेन हिस्से को भी नए डिजाइन और मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

सिंहस्थ यात्रियों और व्यापार दोनों को मिलेगा लाभ

सिंहस्थ-2028 को देखते हुए इस परियोजना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजस्थान, हाड़ौती और मालवा क्षेत्र से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। फोरलेन निर्माण के बाद उज्जैन, घोंसला, घट्टिया, आगर, सुसनेर और सोयत के बीच यात्रा अधिक तेज और सुरक्षित हो जाएगी।

इसके साथ ही यह मार्ग दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे व्यापार, कृषि उपज परिवहन, धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।

10 जून तक मांगी गई हैं निविदाएं

एनएचएआई ने दोनों पैकेजों के लिए 10 जून 2026 तक ऑनलाइन बिड आमंत्रित की हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण एजेंसियों का चयन किया जाएगा। सभी प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृतियां समय पर मिलने पर वर्षाकाल के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

यह परियोजना न केवल सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मजबूती देगी, बल्कि मालवा और हाड़ौती क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

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