नारी वंदन बिल और परिसीमन पर सियासत तेज

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नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित नारी शक्ति से जुड़े विधेयक और आगामी परिसीमन को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस शुरू हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों की ओर से इस विषय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कुछ विपक्षी नेताओं का आरोप है कि नारी वंदन से जुड़े प्रावधानों को पहले लंबित रखा गया और बाद में राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ाया गया। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि यह कदम महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है।

इसी बीच, परिसीमन (Delimitation) को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 की जनगणना के बाद ही नए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह लागू हो सकेगी, जिससे सीटों के पुनर्गठन और प्रतिनिधित्व के स्वरूप में बदलाव संभव है। विपक्ष इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार इसे संवैधानिक प्रक्रिया बता रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरे मुद्दे का असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है। एक ओर जहां सरकार अपनी नीतियों को जनहित में बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति के रूप में देख रहा है।

इस बीच, प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संभावित संबोधन को लेकर भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। जहां समर्थक इसे महत्वपूर्ण नीति घोषणाओं का मंच मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे राजनीतिक संदेश देने का प्रयास बता रहे हैं।