उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में शराबबंदी के बाद अब मांस-मटन और मछली की दुकानों को भी नगर निगम सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। इस संबंध में बुधवार को होने वाली नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद शहर के भीतर संचालित सभी मांस-मटन और मछली की दुकानों को निगम सीमा के बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
वाराणसी मॉडल पर उज्जैन में तैयारी
सूत्रों के अनुसार यह पहल वाराणसी में लागू किए गए निर्णय से प्रेरित है, जहां धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मांस और मछली की दुकानों को शहर के प्रमुख क्षेत्रों से बाहर करने की कार्रवाई की गई थी। अब महाकाल की नगरी उज्जैन में भी इसी प्रकार का कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।
शराबबंदी के बाद उठी थी मांग
गौरतलब है कि 1 अप्रैल 2025 से उज्जैन सहित मध्यप्रदेश के धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू की गई थी। इसके बाद से विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं नागरिक संगठनों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि धार्मिक नगरी की गरिमा और पवित्रता को बनाए रखने के लिए मांस-मटन और मछली की दुकानों को भी शहर की सीमा से बाहर किया जाए।
महापौर ने दिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश
उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि उज्जैन केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यदि धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां शराबबंदी लागू की जा सकती है, तो मांस-मटन और मछली की दुकानों को भी शहरी सीमा से बाहर संचालित किया जाना चाहिए।
महापौर ने बताया कि उन्होंने नगर निगम आयुक्त को इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव में यह व्यवस्था की गई है कि मांस-मटन और मछली की दुकानें नगर निगम सीमा के बाहर निर्धारित क्षेत्रों में संचालित की जाएं।
एमआईसी की मंजूरी के बाद शुरू होगी कार्रवाई
बुधवार को होने वाली एमआईसी बैठक में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। यदि परिषद इसकी मंजूरी देती है तो नगर निगम प्रशासन दुकानों के स्थानांतरण, वैकल्पिक स्थानों के निर्धारण तथा संबंधित नियमों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
व्यापारियों और नागरिकों की नजरें फैसले पर
इस प्रस्ताव को लेकर शहर के व्यापारियों, धार्मिक संगठनों और आम नागरिकों की नजरें एमआईसी बैठक पर टिकी हुई हैं। जहां एक ओर धार्मिक संगठन इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, वहीं व्यापारियों के बीच भी प्रस्ताव के संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रस्ताव पारित होने के बाद इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा और समय-सीमा स्पष्ट होगी।


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