सती गेटके मामले में नगर निगम को जनता का संदेश

उज्जैन। शहर के ऐतिहासिक सती गेट क्षेत्र में प्रस्तावित सर्किल और सड़क निर्माण परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्वीकृत डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में बदलाव कराने के लिए कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है, जिससे शहर के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

जानकारी के अनुसार, नगर निगम द्वारा तैयार और स्वीकृत डीपीआर में सती गेट को केंद्र में रखते हुए सर्किल निर्माण का प्रस्ताव है। योजना के तहत गेट के दोनों ओर लगभग 25-25 फीट चौड़े मार्ग विकसित किए जाने हैं। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित निर्माण से कुछ निजी संपत्तियां प्रभावित हो सकती हैं, जिसके चलते परियोजना को लेकर विरोध के स्वर सामने आए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सती गेट केवल एक ऐतिहासिक संरचना नहीं, बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इतिहासकारों और क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह स्थल किसी मंदिर के रूप में नहीं, बल्कि एक स्मृति-चिह्न के रूप में निर्मित हुआ था, जहां तीन प्रवेश द्वार होने के उल्लेख मिलते हैं। नागरिकों का दावा है कि वर्तमान में दो द्वार उपयोग में हैं, जबकि तीसरे द्वार को भी संरक्षित कर सार्वजनिक रूप से खोला जाना चाहिए।

मामले में यह भी मांग उठी है कि पुरातत्व विभाग की मदद से सती गेट के आसपास हुए संभावित अतिक्रमणों की जांच कराई जाए। नागरिकों का कहना है कि ऐतिहासिक संरचना की सुरक्षा दीवारों और मूल स्वरूप को संरक्षित रखने के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आवश्यक है।

वहीं दूसरी ओर शहर के कई लोगों ने नगर निगम से आग्रह किया है कि स्वीकृत डीपीआर के अनुसार ही कार्य कराया जाए और किसी प्रकार का परिवर्तन न किया जाए। उनका मानना है कि सती गेट को केंद्र में रखते हुए सर्किल निर्माण एवं क्षेत्र का सौंदर्यीकरण यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ शहर की ऐतिहासिक पहचान को भी मजबूती देगा।

अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर टिकी हैं। नागरिकों का कहना है कि निगम को पुरातत्व विभाग से समन्वय स्थापित कर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए तथा विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए निर्णय लेना चाहिए।

सती गेट परियोजना को लेकर बढ़ी इस बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शहर के विकास कार्यों में जनभावनाओं, ऐतिहासिक धरोहरों और प्रशासनिक योजनाओं के बीच सामंजस्य किस प्रकार स्थापित किया जाए। आने वाले दिनों में नगर निगम का निर्णय इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

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