उज्जैन में किसान संकट गहराया — कर्ज, कम भाव और जब्ती की कार्रवाई से टूट रहा अन्नदाता

उज्जैन। जिले सहित प्रदेश के किसानों की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। गेहूं उपार्जन में देरी, मंडियों में उचित मूल्य न मिलना और बैंकों के कर्ज की समय सीमा खत्म होने से किसान आर्थिक दबाव में आ गए हैं। मजबूरी में कई किसान अपनी उपज बिचौलियों को औने-पौने दाम पर बेचने को विवश हैं।

मंडी में नहीं मिल रहा सही दाम, भुगतान भी अटका

किसानों का आरोप है कि मंडियों में न तो समय पर खरीदी हो रही है और न ही फसल का उचित मूल्य मिल रहा है। कई जगह भुगतान में देरी हो रही है, जिससे किसानों की नकदी संकट और गहरा गया है।

कर्ज की समय सीमा बनी सबसे बड़ी परेशानी

किसानों ने खाद-बीज के लिए सहकारी संस्थाओं और राष्ट्रीयकृत बैंकों से ऋण लिया था, जिसकी अंतिम तिथि 31 मार्च तय थी। हालांकि सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख आगे बढ़ा दी, लेकिन कर्ज चुकाने की समय सीमा नहीं बढ़ाई गई।
इस कारण अब किसानों पर 12% वार्षिक ब्याज का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

बिजली बिल न भर पाने पर जब्ती की कार्रवाई

आर्थिक तंगी के चलते किसान बिजली बिल तक नहीं भर पा रहे हैं। आरोप है कि बिजली कंपनियां बकाया वसूली के लिए किसानों के घरों से फ्रिज, कूलर और मोटरसाइकिल तक जब्त कर रही हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में नाराजगी बढ़ रही है।

जमीन बेचने को मजबूर हो रहे किसान

हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई किसान कर्ज चुकाने और पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने के लिए अपनी जमीन बेचने को मजबूर हो रहे हैं। शादी-ब्याह जैसे सामाजिक कार्य भी उनके लिए चुनौती बन गए हैं।

लागत बढ़ी, आय ठहरी — कैसे दोगुनी होगी आय?

किसानों का कहना है कि खाद, बीज, डीजल और पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी उपज का मूल्य नहीं बढ़ रहा। ऐसे में “आय दोगुनी” का लक्ष्य जमीनी स्तर पर अधूरा नजर आ रहा है।

किसान नेताओं पर कार्रवाई से आक्रोश

उज्जैन में किसान नेता अशोक जाट द्वारा मंडियों में तौल गड़बड़ी और कम भाव के खिलाफ आवाज उठाने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने से किसानों में आक्रोश है। उनका कहना है कि आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा है।

विधायक और विपक्ष की आवाज बेअसर

क्षेत्रीय विधायक Mahesh Parmar लगातार किसानों के मुद्दे उठा रहे हैं और मंडियों का दौरा कर रहे हैं, लेकिन किसानों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही। विपक्ष भी आंदोलन कर रहा है, पर समाधान नहीं निकल रहा।

सरकार से प्रमुख मांगें

किसानों ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है—

  • कर्ज चुकाने की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए
  • ब्याज माफ किया जाए
  • फसल की तत्काल खरीदी शुरू हो
  • उचित समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जाए

आत्महत्या की आशंका और सामाजिक संकट

किसानों का कहना है कि लगातार आर्थिक दबाव उन्हें मानसिक रूप से तोड़ रहा है। यदि हालात नहीं सुधरे तो आत्महत्या जैसे गंभीर कदम बढ़ सकते हैं, जो पहले भी सामने आ चुके हैं।